पैंतालीस की उम्र, जब वफ़ादारी का इनाम सिर्फ़ छंटनी और धोखा बनता है | Journalist Vijay

मैं, #JournalistVijay, रोज़ की तरह खबर-दर-खबर गुज़र रहा था। एक पत्रकार की आँखें इतनी खबरों से टकराती हैं कि संवेदनाएँ अक्सर सुन्न पड़ जाती...

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By Journalist Vijay

— Journalist Vijay Mishra की शैली मेंबहुत दिन हुए, जब मैंने एक बार खटारा बस की यात्रा की थी। तब मैं समझता था कि बस सिर्फ लोहे, रबर और पुरानी पेट्रोल की बदबू से बनती है।...

मध्यप्रदेश में निठल्लों की राष्ट्रीय पाठशाला, रीवा का ‘22.3%’ और साहिबों का विकास का ढोल | Journalist Vijay | MP News

सरकारी कागजों की अपनी एक खास गंध होती है। उसमें चूने की बदबू होती है, जिसे बाबू लोग अक्सर 'विकास की महक' कहते हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय (MOSPI) ने 'आवधिक श्रम...

त्योंथर के नये तहसील भवन का ताला कौन खोलेगा? ईंट-सीमेंट का पाखंड और तारीखों का अनंत उत्सव | Journalist Vijay | Rewa News

हमारे इस लोकतांत्रिक और विकासशील देश में किसी सरकारी इमारत का बनकर तैयार हो जाना ही अपने आप में एक आठवाँ अजूबा है। लेकिन इमारत बनने के बाद उसका 'संचालन' शुरू होना असल में उस नौवें...

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मीठी ज़बान, बग़ल में छुरी: आज के जिगरी, कल के जानी दुश्मन by Journalist Vijay

Writer: Journalist Vijayदुनिया में जब किसी नौजवान को पहली बार प्यार या गहरी दोस्ती होती है, तो उसे लगता है कि प्लेटो, सुकरात, ग़ालिब और कबीर—सब बेवकूफ़ थे जो दुनिया को सतर्क रहने की हिदायत देते...

BRICS Summit: राहुल गांधी का थाली दर्शन, चिकन का लोकतंत्र और रील्स के ‘क्रांतिकारी’

हमारे देश की राजनीति भी किसी बहुरंगी मिस्ट्री थ्रिलर से कम नहीं है! जब देश में युवाओं के करियर, बेरोजगारी, स्टार्टअप्स की असफलता और महंगाई जैसे गंभीर मुद्दे ज़रा बोरिंग होने लगते हैं, तो हमारे राजनेता...
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पैंतालीस की उम्र, जब वफ़ादारी का इनाम सिर्फ़ छंटनी और धोखा बनता है | Journalist Vijay

मैं, #JournalistVijay, रोज़ की तरह खबर-दर-खबर गुज़र रहा था। एक पत्रकार की आँखें इतनी खबरों से टकराती हैं कि संवेदनाएँ अक्सर सुन्न पड़ जाती हैं। लेकिन उस ढलती शाम, अचानक मेरी नज़र दो अलग-अलग खबरों पर...
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— Journalist Vijay Mishra की शैली मेंबहुत दिन हुए, जब मैंने एक बार खटारा बस की यात्रा की थी। तब मैं समझता था कि बस सिर्फ लोहे, रबर और पुरानी पेट्रोल की बदबू से बनती है।...

मध्यप्रदेश में निठल्लों की राष्ट्रीय पाठशाला, रीवा का ‘22.3%’ और साहिबों का विकास का ढोल | Journalist Vijay | MP News

सरकारी कागजों की अपनी एक खास गंध होती है। उसमें चूने की बदबू होती है, जिसे बाबू लोग अक्सर 'विकास की महक' कहते हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय (MOSPI) ने 'आवधिक श्रम...

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मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री सुगम परिवहन (MPYPIL): बस की यात्रा, 10% का चंदा और लोक-कल्याण का जुगाड़ | Journalist Vijay | MP News

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त्योंथर के नये तहसील भवन का ताला कौन खोलेगा? ईंट-सीमेंट का पाखंड और तारीखों का अनंत उत्सव | Journalist Vijay | Rewa News

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ChatGPT, काम-वासना का पागलपन और 5000 पन्नों का पाखंड | Journalist Vijay

खानदान की इज्जत, मध्यवर्गीय थू-थू और मर्डर की आसान ट्यूशनहमारे महान, संस्कारी और आध्यात्मिक देश में शादी केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं है।...

सास, सम्मोहन और समाज: मैनपुरी के थाने में जब संस्कृति ने दम तोड़ा | Journalist Vijay

Writer: Journalist Vijayमैनपुरी के घिरोर थाने की हवा में उस दिन अजीब किस्म की खामोशी घुली हुई थी। अमूमन थानों में जो हवा बहती...

इतिहास की अलमारी से निकला ‘गुलाम’ और भारत का पहला ‘आज़ाद’

1914 की ख़िलाफ़त तकरीर से लेकर 1947 के बाद शिक्षा मंत्रालय के विवादित फैसलों तक—जानिए स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद का...

युद्ध, अय्याशी और डॉलर: जब बंकरों से निकला ‘नाइटलाइफ़’ का स्वर्ग by Journalist Vijay

Writer: Journalist Vijayदुनिया में जब भी दो देश आपस में लड़ते हैं, तो मासूम जनता को लगता है कि वहाँ 'देशभक्ति' की मुर्गियाँ दाना...

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‘साहब, अब भागने की जगह नहीं बची!’: अंगोला से गैंगस्टर्स की गिरफ्तारी का इनसाइड स्टोरी

By #JournalistVijayपुराने जमाने में अपराधी सात समुंदर पार भाग जाते थे और सोचते थे कि अब वे कानून की पकड़ से दूर हैं। वे...

Guntur का ‘वाटर वॉर’: क्या वायरल वीडियो ही अब न्याय का नया रास्ता है?

By #JournalistVijayGuntur से एक बहुत ही परेशान करने वाली खबर सामने आई है। एक मामूली-से पानी के विवाद ने इतना खौफनाक रूप ले लिया...